जब हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली वातावरण में मौजूद ऐसे पदार्थों के प्रति जरूरत से ज्यादा प्रतिक्रिया करती है, जो आमतौर पर हानिरहित होते हैं, तो इसे पर्यावरणीय एलर्जी  कहा जाता है। धूल, परागकण, पालतू जानवरों की रूसी और फफूंद जैसे एलर्जेंस इसके सामान्य ट्रिगर हो सकते हैं। इसके लक्षण हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकते हैं और इनमें छींक आना, नाक बहना, खांसी, खुजली, आंखों से पानी आना, थकान और सांस लेने में परेशानी शामिल हो सकती है।

पर्यावरणीय एलर्जी, फूड एलर्जी से अलग होती है। फूड एलर्जी किसी खाद्य पदार्थ के सेवन के बाद होती है, जबकि पर्यावरणीय एलर्जी उन पदार्थों के संपर्क में आने या उन्हें सांस के जरिए अंदर लेने से हो सकती है, जो हमारे आसपास मौजूद होते हैं।

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पर्यावरणीय एलर्जी के लक्षण

पर्यावरणीय एलर्जी के लक्षण अक्सर सर्दी-जुकाम जैसे लग सकते हैं, लेकिन दोनों के कारण अलग होते हैं। सर्दी-जुकाम आमतौर पर वायरस के कारण होता है, जबकि एलर्जी तब होती है जब प्रतिरक्षा प्रणाली किसी खास एलर्जेन को हानिकारक समझकर उसके खिलाफ प्रतिक्रिया करती है।

इसके सामान्य लक्षणों में शामिल हैं:

  • छींक आना
  • नाक बहना या बंद होना
  • सांस लेने में परेशानी
  • आंखों या त्वचा में खुजली
  • सिरदर्द
  • सांस लेते समय घरघराहट
  • थकान
  • आंखों से पानी आना

यदि किसी व्यक्ति को अस्थमा है, तो पर्यावरणीय एलर्जी उसके श्वसन संबंधी लक्षणों को बढ़ा सकती है। वहीं, मौसमी एलर्जी से पीड़ित लोगों में साल के कुछ खास समय, खासकर परागकणों की मात्रा बढ़ने पर, लक्षण अधिक गंभीर हो सकते हैं।

एलर्जी से जुड़े लक्षणों से राहत पाने के लिए ओवर-द-काउंटर एंटीहिस्टामाइन और एयर प्यूरीफायर की हमारी विस्तृत रेंज देखें।

पर्यावरण में पाए जाने वाले सामान्य एलर्जेंस

एलर्जेन ऐसा पदार्थ होता है, जो संवेदनशील व्यक्ति की प्रतिरक्षा प्रणाली में एलर्जी की प्रतिक्रिया पैदा कर सकता है। इसलिए, एलर्जी के ट्रिगर की पहचान करना लक्षणों को नियंत्रित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

धूल के कण

धूल के कण घर के अंदर पाए जाने वाले आम एलर्जेंस में से एक हैं। ये बेहद छोटे जीव होते हैं, जो गद्दों, तकियों, कालीन और फर्नीचर जैसी जगहों पर पनप सकते हैं। गर्म और नम वातावरण इनके लिए अनुकूल होता है।

धूल के कणों से एलर्जी होने पर छींक, नाक बहना, नाक बंद होना और आंखों में खुजली जैसे लक्षण हो सकते हैं।

परागकण

पेड़-पौधों और घास से निकलने वाले परागकण भी आम पर्यावरणीय एलर्जेंस हैं। परागकणों से संवेदनशील लोगों को छींक, नाक बहना, आंखों से पानी आना और गले में खराश जैसी समस्या हो सकती है। परागकणों की मात्रा बढ़ने पर ये लक्षण अधिक परेशान कर सकते हैं।

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पालतू जानवरों की रूसी

पालतू जानवरों की त्वचा से निकलने वाली रूसी (Pet Dander)और उनकी लार में मौजूद कुछ प्रोटीन एलर्जी का कारण बन सकते हैं। इसके सामान्य लक्षणों में शामिल हैं:

  • छींक आना
  • खुजली
  • खांसी
  • त्वचा पर पित्ती या लाल चकत्ते

यदि आप किसी ऐसे घर या जगह पर जाते हैं जहां पालतू जानवर रहते हैं, तो एलर्जी के लक्षण दिखाई दे सकते हैं। यहां तक कि कपड़ों पर चिपकी पालतू जानवरों की रूसी के संपर्क में आने से भी कुछ संवेदनशील लोगों में लक्षण हो सकते हैं।

फफूंद

नमी वाले वातावरण में पनपने वाली फफूंद एलर्जी का एक अन्य सामान्य कारण है। इसके बीजाणु हवा में फैल सकते हैं और संवेदनशील लोगों में एलर्जी के लक्षण पैदा कर सकते हैं।

इसके लक्षणों में शामिल हैं:

  • खांसी
  • सांस लेने में परेशानी
  • छींक आना
  • त्वचा में खुजली

फफूंद नम और सीलन वाली जगहों, जैसे बाथरूम, बेसमेंट और घर के अन्य नमी वाले हिस्सों में अधिक आसानी से पनप सकती है। बारिश के मौसम में घर के अंदर नमी बढ़ने से समस्या बढ़ सकती है।

सिगरेट का धुआं

सिगरेट का धुआं श्वसन तंत्र में जलन पैदा कर सकता है और कुछ लोगों में एलर्जी या सांस से जुड़े लक्षणों को बढ़ा सकता है। यदि आपको एलर्जी है, तो धूम्रपान से बचना और सेकेंड-हैंड स्मोक यानी दूसरे व्यक्ति के धूम्रपान से निकलने वाले धुएं के संपर्क से भी दूर रहना बेहतर है।

पर्यावरणीय एलर्जी का निदान

यदि आपको बार-बार छींक, नाक बहने, आंखों में खुजली या सांस से जुड़ी परेशानी होती है और आपको एलर्जी का संदेह है, तो एलर्जिस्ट या डॉक्टर से सलाह लें।

डॉक्टर आपके लक्षणों का मूल्यांकन करने के साथ आपके मेडिकल और पारिवारिक इतिहास के बारे में भी जानकारी ले सकते हैं। जरूरत पड़ने पर एलर्जी की जांच कराकर यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि कौन-सा एलर्जेन आपके लक्षणों को ट्रिगर कर रहा है।

एलर्जी की जांच में शामिल हो सकते हैं:

एलर्जी के ट्रिगर की पहचान होने के बाद डॉक्टर आपके लक्षणों और स्थिति के अनुसार उचित दवा और उपचार की सलाह दे सकते हैं।

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पर्यावरणीय एलर्जी का उपचार

एलर्जी का उपचार उसके कारण और लक्षणों की गंभीरता पर निर्भर करता है। सबसे पहले, जिस एलर्जेन से समस्या हो रही है, उसके संपर्क को कम करना महत्वपूर्ण है।

डॉक्टर कुछ लोगों को लक्षणों से राहत के लिए ओवर-द-काउंटर (OTC) एंटीहिस्टामाइन लेने की सलाह दे सकते हैं। हालांकि, कुछ एंटीहिस्टामाइन से उनींदापन हो सकता है। इसलिए, कोई भी दवा लेने से पहले डॉक्टर या फार्मासिस्ट से सलाह लेना बेहतर है।

सेटिरीजिन (Cetirizine) और लॉराटाडीन (Loratadine) जैसे एंटीहिस्टामाइन आमतौर पर एलर्जी के लक्षणों को नियंत्रित करने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं। कुछ नई पीढ़ी के एंटीहिस्टामाइन से पुराने एंटीहिस्टामाइन की तुलना में उनींदापन की संभावना कम हो सकती है, लेकिन व्यक्ति-व्यक्ति में प्रतिक्रिया अलग हो सकती है।

गंभीर या लगातार एलर्जी के मामलों में डॉक्टर प्रिस्क्रिप्शन दवाएं, नेजल स्प्रे या अन्य उपचार सुझा सकते हैं। कुछ लोगों के लिए इम्यूनोथेरेपी  भी एक विकल्प हो सकती है। इसमें लंबे समय तक नियंत्रित तरीके से एलर्जेन की छोटी मात्रा देकर शरीर की एलर्जी प्रतिक्रिया को कम करने का प्रयास किया जाता है।

पर्यावरणीय एलर्जी से बचाव के उपाय

एलर्जी को पूरी तरह खत्म करना हमेशा संभव नहीं होता, लेकिन एलर्जेंस के संपर्क को कम करके लक्षणों को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। कुछ आसान उपाय हैं:

  • घर की हवा को साफ रखने के लिए उपयुक्त एयर फिल्टर या HEPA फिल्टर का इस्तेमाल करें।
  • धूल के कणों से बचने के लिए एलर्जी-प्रूफ तकिए और गद्दे के कवर का इस्तेमाल करें।
  • परागकणों की मात्रा अधिक होने पर खिड़कियां बंद रखें।
  • घर में धूल और नमी को नियंत्रित करें।
  • पालतू जानवरों को बेडरूम से बाहर रखने से रूसी के संपर्क को कम करने में मदद मिल सकती है।
  • बिस्तर की चादर और तकिए के कवर नियमित रूप से धोएं।
  • घर में फफूंद या सीलन दिखाई दे तो उसे जल्द साफ करें और नमी को नियंत्रित करें।
  • धूम्रपान और सेकेंड-हैंड स्मोक से बचें।
  • बाहर से आने के बाद हाथ-मुंह धोना और कपड़े बदलना परागकणों जैसे एलर्जेंस के संपर्क को कम करने में मदद कर सकता है।

कुछ लोग एलर्जी के लक्षणों को नियंत्रित करने के लिए प्रोबायोटिक सप्लीमेंट या एसेंशियल ऑयल जैसे प्राकृतिक विकल्पों का इस्तेमाल करते हैं। हालांकि, इन्हें एलर्जी के प्रमाणित उपचार का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। किसी भी सप्लीमेंट या एसेंशियल ऑयल का इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है, खासकर यदि आपको अस्थमा या गंभीर एलर्जी है।

निष्कर्ष

पर्यावरणीय एलर्जी रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित कर सकती है, लेकिन इसके ट्रिगर की पहचान और उनसे बचाव करने से लक्षणों को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। धूल, परागकण, पालतू जानवरों की रूसी, फफूंद और धुएं जैसे सामान्य एलर्जेंस से दूरी बनाना महत्वपूर्ण है। यदि एलर्जी के लक्षण बार-बार होते हैं, लंबे समय तक बने रहते हैं या सांस लेने में परेशानी बढ़ रही है, तो सही निदान और उपचार के लिए डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

संदर्भ:

https://my.clevelandclinic.org/health/diseases/8611-environmental-allergies

https://www.mayoclinic.org/diseases-conditions/allergies/symptoms-causes/syc-20351497

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https://my.clevelandclinic.org/health/diseases/17712-dust-mite-allergy 

https://www.mayoclinic.org/diseases-conditions/hay-fever/in-depth/seasonal-allergies/art-20048343

https://www.medlineplus.gov/ency/article/000813.htm